
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) उस वक्त दहशत में डूब गई, जब देर रात कैंपस के भीतर ही एक टीचर को गोली मार दी गई। जिस जगह किताबों की आवाज़ होनी चाहिए थी, वहां गनशॉट्स गूंज उठे।
घटना के बाद पूरे कैंपस में अफरा-तफरी मच गई। छात्र सहमे हुए, स्टाफ सन्न, और सवाल वही — कैंपस कितना सुरक्षित है?
लाइब्रेरी कैंटीन के पास हमला, मौके पर मौत
जानकारी के मुताबिक, एएमयू के एबीके हाई स्कूल में कंप्यूटर टीचर राव दानिश देर रात लाइब्रेरी कैंटीन के पास मौजूद थे। तभी अचानक दो नकाबपोश बदमाश वहां पहुंचे और बेहद नजदीक से दानिश को गोली मार दी।
हमलावर वारदात के बाद फरार। गोली लगते ही दानिश ज़मीन पर गिर पड़े। आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जिस कैंपस में भविष्य गढ़ा जाता है, वहीं एक शिक्षक का भविष्य खत्म कर दिया गया।
पुलिस जांच में जुटी, वजह अब भी रहस्य
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को सील कर दिया गया।
फिलहाल — हमले की वजह साफ नहीं। आरोपियों की पहचान नहीं। CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है।

कभी परीक्षा के सवाल मुश्किल होते हैं, कभी सिस्टम के।
कैंपस में डर और गुस्सा
टीचर की हत्या के बाद छात्रों में डर का माहौल है। स्टाफ में भारी नाराज़गी। सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल। छात्रों का कहना है कि
अगर यूनिवर्सिटी कैंपस में भी जान सुरक्षित नहीं, तो फिर Safe Zone आखिर है कहां?
एक शिक्षक की मौत, कई सवाल जिंदा
राव दानिश सिर्फ एक टीचर नहीं थे, बल्कि सैकड़ों छात्रों के लिए Guide और Mentor थे। उनकी मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि — कैंपस सिक्योरिटी कितनी मजबूत है? रात में गश्त क्यों नहीं? नकाबपोश बदमाश अंदर कैसे पहुंचे?
अपराध का अड्डा बनता शिक्षण संस्थान?
AMU जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में इस तरह की वारदात सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर तमाचा है। जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं की जाती। तब तक यह डर बना रहेगा कि अगली गोली किसके हिस्से आएगी।
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